राष्ट्रीय राजमार्ग 6 पर नारकीय यातना, प्रशासन गहरी नींद में!

बराकबाणी डिजिटल डेस्क, सिलचर, 24 मई: कटीगड़ा तथा बराक घाटी की जीवनरेखा मानी जाने वाली बदरपुर–गुवाहाटी राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 6 (NH-6) की बदहाल स्थिति अब आम जनजीवन के लिए सबसे बड़ी चिंता और भय का कारण बन चुकी है। हर दिन समाचार पत्रों की सुर्खियों में इस सड़क की दुर्दशा सामने आ रही है और सोशल मीडिया पर विशाल गड्ढों, जलभराव और वाहनों की परेशानियों की तस्वीरें वायरल हो रही हैं। लेकिन आरोप है कि सब कुछ देखने के बावजूद प्रशासन और जनप्रतिनिधि पूरी तरह निष्क्रिय बने हुए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, सरकार और प्रशासन मानो गहरी नींद में हैं।

जिस सड़क से प्रतिदिन हजारों यात्री बसें, मालवाहक ट्रक, एम्बुलेंस, स्कूल–कॉलेज की गाड़ियां और आम लोग आवागमन करते हैं, वही सड़क आज लगभग मौत के जाल में बदल चुकी है। बदरपुर घाट से मालीधर तक कई हिस्सों में सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। कहीं वे छोटे तालाब जैसे दिखाई देते हैं तो कहीं सड़क के बीचोंबीच गहरी खाई बन चुकी है। जो कभी राष्ट्रीय राजमार्ग कहलाता था, आज वह सड़क है या जलमार्ग यह समझना मुश्किल हो गया है।

कटीगड़ा चौक क्षेत्र की स्थिति सबसे अधिक भयावह बताई जा रही है। राष्ट्रीय राजमार्ग के बीचोंबीच मानो एक विशाल नाला बन गया हो। भारी वाहनों के दबाव से गड्ढे लगातार बड़े होते जा रहे हैं। गड्ढों में जमा पत्थर और कंकड़ वाहनों के पहियों से उछलकर दुकानों और राहगीरों तक पहुंच रहे हैं। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि वे हर दिन डर के माहौल में दुकान खोलने को मजबूर हैं। किसी भी समय बड़ी दुर्घटना हो सकती है।

एक दुकानदार ने आरोप लगाया कि वाहन गुजरते ही पत्थर उड़कर दुकान की टिन की छत से टकराते हैं, कई बार ग्राहकों को भी चोट लगने का खतरा रहता है, लेकिन प्रशासन का कोई अधिकारी अब तक हालात देखने नहीं आया। कटीगड़ा का यह राष्ट्रीय राजमार्ग अब लोगों के लिए किसी नरक से कम नहीं रह गया है। पैदल चलना लगभग असंभव हो चुका है। ऑटो चालक, छोटे वाहन चालक और बाइक सवार सबसे ज्यादा जोखिम झेल रहे हैं।

एक ऑटो चालक ने नाराजगी जताते हुए कहा कि गड्ढों से बचने के लिए कभी दाईं ओर तो कभी बाईं ओर वाहन मोड़ना पड़ता है, जिससे आमने-सामने टक्कर का खतरा बना रहता है। रोजाना वाहन खराब हो रहे हैं और कमाई का बड़ा हिस्सा मरम्मत में खर्च हो जाता है। बस चालकों का भी यही कहना है कि सड़क की यह स्थिति केवल वाहनों को नुकसान नहीं पहुंचा रही, बल्कि यात्रियों की जान को भी खतरे में डाल रही है। खासकर रात में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है क्योंकि जलभराव के कारण गड्ढों की गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता। परिणामस्वरूप ट्रक और बसें बीच रास्ते फंस जाती हैं और लंबे जाम लग जाते हैं।

गुमड़ा, दिगरखाल और लक्षीछड़ा क्षेत्रों में स्थिति और भी खराब बताई जा रही है। लगातार गड्ढों के कारण वाहन लगभग रेंगते हुए चल रहे हैं। कई बार लोगों को घंटों जाम में फंसे रहना पड़ता है। मरीजों को लेकर जा रही एम्बुलेंस भी इससे अछूती नहीं हैं। स्कूल–कॉलेज के छात्रों और उनके अभिभावकों में भी भारी नाराजगी देखी जा रही है। अभिभावकों का कहना है कि उन्हें हर दिन बच्चों को जान जोखिम में डालकर स्कूल भेजना पड़ रहा है। बारिश के दिनों में स्थिति और भी खराब हो जाती है, जब बच्चों को कीचड़ और गंदे पानी से होकर स्कूल पहुंचना पड़ता है।

एक अभिभावक ने कहा कि सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन राष्ट्रीय राजमार्ग की यह स्थिति बेहद शर्मनाक है। शिक्षकों का भी कहना है कि सड़क की खराब हालत के कारण कई छात्र नियमित रूप से स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं और शिक्षक भी समय पर विद्यालय पहुंचने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इधर स्थानीय लोगों का आरोप सीधे निर्माण एजेंसी एनएचआईडीसीएल (NHIDCL) पर है। उनका कहना है कि निम्न गुणवत्ता की निर्माण सामग्री और लापरवाही के कारण करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद कुछ ही महीनों में सड़क की यह हालत हो गई।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि बराक घाटी को हमेशा उपेक्षित किया गया है। उनका कहना है कि यदि यही स्थिति ब्रह्मपुत्र घाटी में होती तो अब तक युद्धस्तर पर मरम्मत शुरू हो जाती। शनिवार को लक्षीछड़ा क्षेत्र में स्थानीय लोगों ने स्वयं पत्थर डालकर सड़क की मरम्मत शुरू की। इससे पहले दिगरखाल क्षेत्र में भी लोगों ने चंदा जुटाकर गड्ढे भरने का प्रयास किया था। राष्ट्रीय राजमार्ग की मरम्मत के लिए आम लोगों को आगे आना पड़ना प्रशासनिक विफलता का प्रतीक बताया जा रहा है।

कुल मिलाकर बदरपुर–गुवाहाटी राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 6 की मौजूदा स्थिति अब केवल एक टूटी सड़क का मामला नहीं रह गई है, बल्कि यह प्रशासनिक उदासीनता, अधूरी विकास नीति और बराक घाटी की लंबे समय से चली आ रही उपेक्षा का प्रतीक बनती जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही स्थायी मरम्मत कार्य युद्धस्तर पर शुरू नहीं किया गया, तो आने वाले समय में बड़े जन आंदोलन, विरोध प्रदर्शन या राष्ट्रीय राजमार्ग अवरोध जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है, क्योंकि लोगों के धैर्य की सीमा अब समाप्त होने लगी है।

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