स्वास्थ्यकर्मी के हस्ताक्षर और सरकारी मुहर की जालसाजी का आरोप, जांच में जुटी पुलिस।
बराकबाणी डिजिटल डेस्क, सिलचर 28 मईः सरकारी दस्तावेज, स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक मुहर और जिम्मेदार स्वास्थ्यकर्मी के हस्ताक्षर की जालसाजी कर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार करने के आरोप में काछार जिले के सोनाई विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत कछुदरम थाना के धेयाली इलाके में सनसनी फैल गई है। इस घटना को लेकर जहां स्वास्थ्य विभाग में चिंता का माहौल है, वहीं आम लोगों के बीच भी भारी आक्रोश और दहशत देखी जा रही है। आरोप है कि सुनियोजित तरीके से सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर कर मृत्यु की तिथि बदलकर एक फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार किया गया है। इस मामले में अपने हस्ताक्षर और आधिकारिक मुहर के जालसाजी होने का आरोप लगाते हुए सोनाई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) के अधीन धेयाली सब-सेंटर की एक एएनएम स्वास्थ्यकर्मी ने कछुदरम थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। जानकारी के अनुसार पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

एफआईआर के अनुसार, धेयाली सब-सेंटर क्षेत्र के निवासी जउरुल आलम लस्कर नामक व्यक्ति की मृत्यु 25 दिसंबर 2025 को हुई थी। मृत्यु की सूचना मिलने के बाद जिम्मेदार स्वास्थ्यकर्मी ने सरकारी नियमों के अनुसार उसे आधिकारिक रजिस्टर में दर्ज किया था। लेकिन उस समय मृतक के परिवार की ओर से किसी भी मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए आवेदन नहीं दिया गया था। आरोप के मुताबिक, हाल ही में अचानक स्वास्थ्यकर्मी के पास जउरुल आलम लस्कर के नाम पर एक मृत्यु प्रमाण पत्र से संबंधित आवेदन पत्र पहुंचा। आवेदन की जांच करते समय ही संदेह पैदा हुआ। आवेदन पत्र में मृतक की मृत्यु तिथि 26 मार्च 2026 दर्ज की गई थी, जो सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज वास्तविक मृत्यु तिथि से पूरी तरह अलग है। इतना ही नहीं, आवेदन पत्र में इस्तेमाल किए गए स्वास्थ्यकर्मी के हस्ताक्षर और कार्यालय की मुहर भी पूरी तरह फर्जी बताई जा रही है।
स्वास्थ्यकर्मी का आरोप है कि इस जालसाजी को बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया है। उनका कहना है कि सरकारी रिकॉर्ड में बदलाव कर किसी विशेष उद्देश्य को हासिल करने की कोशिश की गई है। साथ ही उनके लंबे समय के ईमानदार कार्यजीवन और सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की साजिश भी इसके पीछे हो सकती है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि मृतक की पत्नी रेहाना बेगम लस्कर ने स्थानीय आशाकर्मी होसनारा बेगम की मदद से इस फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र के आवेदन पत्र को तैयार कराया है, ऐसा संदेह जताया जा रहा है। हालांकि आरोपों की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी, लेकिन मामला सामने आते ही पूरे इलाके में भारी हलचल मच गई है।
घटना की गंभीरता को लेकर जागरूक लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। क्योंकि मृत्यु प्रमाण पत्र केवल एक कागज नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण सरकारी और कानूनी दस्तावेज होता है। जमीन-जायदाद के स्वामित्व, बैंक खातों, बीमा दावों, पेंशन, उत्तराधिकार संबंधी दस्तावेजों सहित कई प्रशासनिक कार्यों में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में यदि यही दस्तावेज जालसाजी के जरिए तैयार किए जाएं, तो पूरे प्रशासनिक तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो जाते हैं।
स्थानीय लोगों के एक वर्ग का कहना है कि ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों और सब-सेंटरों में कई मामलों में दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया कमजोर है। इसी अवसर का फायदा उठाकर असामाजिक और भ्रष्ट गिरोह सक्रिय हो रहे हैं। उनका आरोप है कि लंबे समय से कुछ इलाकों में दलालों का एक नेटवर्क सक्रिय है, जो पैसों के बदले जन्म और मृत्यु संबंधी दस्तावेज उपलब्ध कराने के नाम पर विभिन्न प्रकार की अनियमितताएं चला रहा है। लोगों का मानना है कि यह घटना उसी बड़े भ्रष्टाचार का एक खतरनाक उदाहरण हो सकती है।
स्वास्थ्य विभाग का एक वर्ग भी इस मामले को बेहद गंभीर मान रहा है। क्योंकि किसी सरकारी स्वास्थ्यकर्मी की मुहर और हस्ताक्षर की जालसाजी केवल व्यक्तिगत धोखाधड़ी नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सीधा हमला है। अब सवाल उठ रहे हैं कि सरकारी मुहर की नकल कैसे तैयार की गई? इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं? क्या इसके पीछे कोई संगठित जालसाजी गिरोह काम कर रहा है?
पीड़ित स्वास्थ्यकर्मी ने आधिकारिक रजिस्टर की जेरॉक्स कॉपी प्रमाण के रूप में पुलिस प्रशासन को सौंप दी है। उन्होंने दोषियों की जल्द गिरफ्तारी और कड़ी सजा की मांग की है। साथ ही भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से अधिक कड़ी निगरानी और दस्तावेज सत्यापन व्यवस्था लागू करने की मांग भी उठ रही है।
इस घटना को लेकर आम लोगों में भी नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि सरकारी दस्तावेजों की जालसाजी जैसा गंभीर अपराध इतनी आसानी से हो सकता है, तो आम नागरिकों की जानकारी और पहचान कितनी सुरक्षित है, यह भी एक बड़ा सवाल बन गया है। कुल मिलाकर, सोनाई का यह फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र कांड अब केवल धोखाधड़ी के आरोप तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने सरकारी दस्तावेज प्रणाली की सुरक्षा, प्रशासनिक पारदर्शिता और ग्रामीण स्तर पर संभावित भ्रष्टाचार की एक चिंाजनक तस्वीर सामने ला दी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच में कौन-कौन से चौंकाने वाले तथ्य सामने आते हैं और आखिरकार प्रशासन इस मामले में कितनी सख्त कार्रवाई करता है।





