मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रिश्तेदार को देखने के बाद स्कूटी से घर लौटते समय हुआ हादसा; तेज रफ्तार और खतरनाक ओवरटेकिंग को लेकर स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी
बराकबाणी डिजिटल डेस्क, सिलचर, 21 मई: कछार जिले के सोनाबाड़ीघाट बाइपास पर बुधवार शाम एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा सामने आया। एक पल की लापरवाही, तेज रफ्तार वाहनों की बेपरवाह आवाजाही और खतरनाक ओवरटेकिंग ने दो युवकों की जान ले ली। इस दर्दनाक दुर्घटना में धलाई क्षेत्र के दो युवकों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। मृतकों की पहचान धलाई के भुवनडहर चाय बागान अंतर्गत टुपीडहर गांव निवासी सुप्पन राय (25) और सुरेंद्र राय (24) के रूप में हुई है।
बुधवार शाम लगभग साढ़े पांच बजे सैदपुर इलाके के सोनाबाड़ीघाट बाइपास रोड पर यह भयावह हादसा हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दृश्य इतना वीभत्स था कि वहां मौजूद लोग भी दहल उठे। बताया गया कि दोनों युवक सिलचर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती एक रिश्तेदार को देखने के बाद स्कूटी से घर लौट रहे थे। AS-11 AH-2056 नंबर की स्कूटी पर सवार होकर वे धलाई की ओर जा रहे थे। लेकिन घर पहुंचने से पहले ही उनकी जिंदगी सड़क पर खत्म हो गई।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, स्कूटी चालक एक भारी लॉरी को ओवरटेक करने की कोशिश कर रहा था। तभी सामने से तेज गति में एक ऑटो आते देख चालक ने अचानक ब्रेक लगा दिया। अचानक ब्रेक लगाने से स्कूटी का संतुलन बिगड़ गया और वाहन सड़क पर फिसलते हुए नियंत्रण से बाहर हो गया। दोनों युवक सड़क पर जा गिरे और पीछे से आ रही AS-11-DC-1992 नंबर की लॉरी के पिछले पहिए के नीचे आ गए।
हादसा इतना भीषण था कि एक युवक का सिर पूरी तरह कुचल गया, जबकि दूसरे के सीने और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। स्थानीय लोग तुरंत मदद के लिए दौड़े, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सड़क पर खून से लथपथ दोनों युवकों के शव देखकर राहगीर भी सन्न रह गए। कुछ ही मिनटों में पूरे इलाके में शोक और दहशत का माहौल फैल गया।
सूचना मिलते ही पुलिस और ट्रैफिक पुलिस मौके पर पहुंची। स्थानीय लोगों की मदद से दोनों शवों को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए सिलचर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल भेजा गया। दुर्घटना के बाद लगभग एक घंटे तक उस इलाके में यातायात पूरी तरह बाधित रहा। सड़क के दोनों ओर लंबा जाम लग गया। बाद में पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त स्कूटी और लॉरी को जब्त कर स्थिति को नियंत्रित किया।
इस दर्दनाक घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा गया। लोगों का आरोप है कि सोनाबाड़ीघाट बाइपास पर लंबे समय से भारी वाहनों की बेलगाम आवाजाही जारी है। आए दिन वहां छोटे-बड़े हादसे हो रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा। खासकर शाम के समय ट्रैफिक नियंत्रण की कमी, खतरनाक ओवरटेकिंग और तेज रफ्तार भारी वाहन आम लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। एक स्थानीय बुजुर्ग ने नाराजगी जताते हुए कहा, “यह बाइपास अब मौत का रास्ता बन चुका है। अगर नियमित पुलिस गश्त और स्पीड कंट्रोल की व्यवस्था होती, तो शायद आज इन दो युवकों की जान नहीं जाती।”
जानकारी के अनुसार, दोनों मृत युवक तमिलनाडु में काम करते थे। रोज़गार की तलाश में वे लंबे समय से बाहर रह रहे थे और कुछ दिन पहले ही घर लौटे थे। परिवार और रिश्तेदारों के साथ खुशियां मनाने का समय देखते ही देखते मातम में बदल गया। बुधवार को वे एक बीमार रिश्तेदार को देखने सिलचर आए थे, लेकिन लौटते समय यह हादसा हो गया।
घटना की खबर फैलते ही भुवनडहर चाय बागान और टुपीडहर गांव में मातम छा गया। रात होते-होते मृतकों के घरों में चीख-पुकार मच गई। परिजन और ग्रामीणों की भीड़ से पूरा इलाका गमगीन हो उठा। गांव के लोगों ने बताया कि दोनों युवक बेहद शांत, मेहनती और मिलनसार स्वभाव के थे। उनकी असमय मौत को कोई भी स्वीकार नहीं कर पा रहा है।
इस हादसे ने एक बार फिर जिले की सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं क्या केवल चालकों की लापरवाही का परिणाम हैं, या फिर प्रशासनिक उदासीनता भी इसके लिए समान रूप से जिम्मेदार है, यह सवाल अब आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बन चुका है। जागरूक नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते गति नियंत्रण, नियमित ट्रैफिक निगरानी और दुर्घटनाप्रवण इलाकों में कड़े सुरक्षा उपाय लागू नहीं किए गए, तो भविष्य में और भी बड़े हादसे हो सकते हैं।





