सांसद-विधायक के नियमित आवागमन वाला मार्ग भी बना खतरनाक, सड़क मरम्मत नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी छात्रों की
बराकबाणी डिजिटल डेस्क, सिलचर, 21 मई: सिलचर से असम विश्वविद्यालय जाने वाली अत्यंत महत्वपूर्ण सड़क की भयावह बदहाल स्थिति को लेकर लोगों में नाराज़गी, निराशा और तीव्र जनाक्रोश लगातार विस्फोटक रूप ले रहा है। विशेष रूप से शिलकुड़ी डाकघर के सामने से शिलकुड़ी कैंप तक फैले लंबे हिस्से में बड़े-बड़े गड्ढे, टूटी-फूटी सड़क, कीचड़युक्त जलभराव और खतरनाक मार्ग की वजह से प्रतिदिन हजारों लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है। लेकिन प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और सत्तारूढ़ दल के नेताओं की रहस्यमय चुप्पी ने आम लोगों के गुस्से को और बढ़ा दिया है।
बराक घाटी के प्रमुख शैक्षणिक केंद्रों में से एक असम विश्वविद्यालय को शहर से जोड़ने वाली यह सड़क अब स्थानीय लोगों के अनुसार “मौत का जाल” बन चुकी है। प्रतिदिन इसी मार्ग से विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएँ, शोधार्थी, शिक्षक, कर्मचारी, चिकित्सक, नौकरीपेशा लोग, व्यापारी, मरीज, स्कूली बच्चे और हजारों आम नागरिक आवाजाही करते हैं। लेकिन सड़क की वर्तमान स्थिति के कारण हर यात्रा एक भयावह अनुभव बनती जा रही है।

विशेष रूप से हल्की बारिश होते ही सड़क के बड़े-बड़े गड्ढे कीचड़ भरे पानी से ढक जाते हैं। ऐसे में कहाँ सड़क है और कहाँ गड्ढा, इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल हो जाता है। परिणामस्वरूप लगभग हर दिन बाइक सवार, ऑटो रिक्शा, ई-रिक्शा और छोटी गाड़ियाँ दुर्घटनाओं का शिकार हो रही हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि कई लोग घायल होने के बावजूद प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा।
विश्वविद्यालय के एक छात्र ने नाराज़गी व्यक्त करते हुए कहा, हम हर दिन जान जोखिम में डालकर विश्वविद्यालय जाते हैं। कब दुर्घटना हो जाए, कहा नहीं जा सकता। विकास की बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं, लेकिन विश्वविद्यालय की सड़क की यह हालत सरकार की वास्तविक तस्वीर सामने ला रही है। एक प्रोफेसर ने अफसोस जताते हुए कहा, देश-विदेश से अतिथि सेमिनारों में भाग लेने आते हैं। लेकिन विश्वविद्यालय पहुँचने से पहले ही सड़क की हालत देखकर हैरान रह जाते हैं। यह सिर्फ सड़क की दुर्दशा नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता की तस्वीर है।
अभिभावकों का आरोप है कि बच्चों को हर दिन इस खतरनाक सड़क से भेजने को लेकर वे लगातार चिंता में रहते हैं। कई बार ऑटो पलटने से छात्र-छात्राओं के घायल होने की भी शिकायत सामने आई है। इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधि मानो सब कुछ जानते हुए भी उदासीन बने हुए हैं।
सबसे अधिक परेशानी ऑटो रिक्शा और छोटी गाड़ियों के चालकों को हो रही है। सिलचर–असम विश्वविद्यालय मार्ग के एक ऑटो चालक ने नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा, सड़क की वजह से गाड़ियों के पुर्जे खराब हो रहे हैं। हर महीने हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। यात्री भी कम हो रहे हैं। लेकिन नेता और मंत्री केवल चुनाव के समय जनता को याद करते हैं। एक एम्बुलेंस चालक ने बताया कि गंभीर मरीजों को लेकर इस सड़क से गुजरते समय कई बार बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है। गड्ढों में झटके लगने से मरीजों की हालत और बिगड़ जाती है।

स्थानीय व्यापारियों और निवासियों का कहना है कि सड़क मरम्मत की मांग को लेकर कई बार आवेदन, ज्ञापन और मौखिक शिकायतें दी गईं, लेकिन प्रशासन की ओर से केवल आश्वासन ही मिला, कोई वास्तविक काम नहीं हुआ। उल्टा, हर बरसात में सड़क की हालत और भी खराब हो जाती है। लोगों का सवाल है, करोड़ों रुपये के विकास के विज्ञापन देने वाली सरकार क्या इस महत्वपूर्ण सड़क की बदहाली नहीं देख पा रही?
नाराज़ नागरिकों के एक वर्ग का कहना है कि सिलचर के सांसद परिमल शुक्लबैद्य नियमित रूप से इसी सड़क से अपने आइरंगमारा स्थित निवास तक आते-जाते हैं। फिर भी सड़क की यह भयावह स्थिति उनकी नजरों से कैसे बच रही है? इसी तरह क्षेत्र के नव-निर्वाचित विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। लोगों का आरोप है कि चुनाव के समय विकास के वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही जनता की परेशानियाँ महत्वहीन हो जाती हैं।
सचेत नागरिकों का मानना है कि असम विश्वविद्यालय पूर्वोत्तर भारत का एक महत्वपूर्ण केंद्रीय विश्वविद्यालय है। यहाँ प्रतिदिन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के सेमिनार, शोध चर्चा और शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। देश के विभिन्न हिस्सों से विशिष्ट लोग यहाँ आते हैं। लेकिन विश्वविद्यालय के प्रवेश मार्ग की यह दयनीय स्थिति पूरे क्षेत्र की छवि पर सवाल खड़े कर रही है।
इस बीच छात्रों के एक वर्ग ने चेतावनी दी है कि यदि तत्काल सड़क मरम्मत का काम शुरू नहीं किया गया, तो वे बड़े जन आंदोलन की राह अपनाएँगे। आवश्यकता पड़ने पर सड़क जाम, विरोध प्रदर्शन और हस्ताक्षर अभियान जैसे कार्यक्रम भी शुरू किए जा सकते हैं। क्षेत्र के निवासियों, दैनिक यात्रियों, शिक्षकों, अभिभावकों और आम जनता की एक ही मांग है, अब और उपेक्षा नहीं। सिलचर–असम विश्वविद्यालय सड़क का तत्काल पूर्ण पुनर्निर्माण कर सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित किया जाए। अन्यथा जनाक्रोश और अधिक उग्र रूप ले सकता है।





