2012 से भारत में छिपकर रह रहे थे, बेंगलुरु से आकर सीमा पार कर बांग्लादेश भागने की साजिश को कछार पुलिस ने किया नाकाम
बराकबाणी डिजिटल डेस्क, सिलचर, 21 मई: कछार जिले के गुमड़ा इलाके में एक बार फिर सीमा सुरक्षा और अवैध घुसपैठ का चिंताजनक मामला सामने आया है। पुलिस अभियान में तीन बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है, जो पिछले लगभग एक दशक से अधिक समय से भारत के विभिन्न हिस्सों में अवैध रूप से रह रहे थे। गिरफ्तार लोगों की पहचान रीना अख्तर, मोहम्मद आवाल और मोहम्मद हारून के रूप में हुई है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, ये तीनों वर्ष 2012 में अवैध रूप से भारत में दाखिल हुए थे। इसके बाद वे अलग-अलग राज्यों में अपनी पहचान छिपाकर कामकाज और रहन-सहन करते रहे। हाल ही में वे बेंगलुरु से कछार पहुंचे थे और यहां से अवैध रूप से सीमा पार कर दोबारा बांग्लादेश जाने की योजना बना रहे थे। लेकिन गुप्त सूचना के आधार पर कछार पुलिस ने अभियान चलाकर गुमड़ा इलाके से तीनों को गिरफ्तार कर लिया।
जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से सीमावर्ती इलाकों में संदिग्ध गतिविधियों और आवाजाही पर विशेष निगरानी रखी जा रही थी। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार लोगों की गतिविधियों और बातचीत में असंगति पाए जाने के बाद उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई। पूछताछ के दौरान उन्होंने खुद को बांग्लादेशी नागरिक स्वीकार किया तथा वर्षों पहले अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने की बात भी सामने आई।
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, “प्रारंभिक जांच में पता चला है कि ये लोग लंबे समय से भारत के विभिन्न शहरों में मजदूरी का काम कर रहे थे। हाल के दिनों में प्रशासन द्वारा दस्तावेजों की जांच और निगरानी कड़ी किए जाने के कारण वे दोबारा बांग्लादेश भागने की कोशिश कर रहे थे।” हालांकि, भारत में प्रवेश के लिए इस्तेमाल किए गए रास्ते, इसमें किसने मदद की और इतने वर्षों तक वे प्रशासन की नजरों से कैसे बचे रहे इन सभी पहलुओं की जांच जारी है।
इस घटना के बाद सीमा सुरक्षा और अवैध घुसपैठ रोकने को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर फिर सवाल उठने लगे हैं। एक ओर केंद्र और राज्य सरकारें सीमा पर कड़ी निगरानी का दावा करती हैं, वहीं दूसरी ओर विदेशी नागरिकों का वर्षों तक देश के विभिन्न हिस्सों में रहना सुरक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सीमा पर निगरानी बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए राज्यों के बीच बेहतर सूचना आदान-प्रदान, श्रमिकों की पहचान का सत्यापन और फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोहों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जरूरी है। कई मामलों में देखा गया है कि अवैध घुसपैठिए फर्जी पहचान पत्र बनवाकर सामान्य नागरिकों की तरह विभिन्न राज्यों में काम करने लगते हैं, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सीमावर्ती इलाकों में अब भी दलाल गिरोह सक्रिय हैं, जो पैसों के बदले अवैध रूप से सीमा पार कराने का काम करते हैं। ऐसे में समय-समय पर कुछ लोगों की गिरफ्तारी तो होती है, लेकिन असली नेटवर्क अक्सर पुलिस की पकड़ से बाहर रह जाता है।
गुमड़ा में तीन बांग्लादेशी नागरिकों की गिरफ्तारी के बाद इलाके में काफी चर्चा और हलचल का माहौल है। स्थानीय लोगों ने सीमा क्षेत्रों में और अधिक कड़ी निगरानी तथा नियमित तलाशी अभियान चलाने की मांग की है। साथ ही पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इतने वर्षों तक वे कहां-कहां रहे, किन लोगों के संपर्क में थे और क्या उनका किसी बड़े नेटवर्क से संबंध था।
फिलहाल कछार पुलिस गिरफ्तार तीनों से लगातार पूछताछ कर रही है। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनके खिलाफ विदेशी अधिनियम समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया जा सकता है। जांच के हित में पुलिस ने अभी अधिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन इस पूरे मामले के पीछे किसी बड़े नेटवर्क की भूमिका की भी जांच की जा रही है।





